करोना काल की छह सिंखे (मेरा पहला हिंदी ब्लॉग)
नमस्कार. मैंने आज तक मराठी और इंग्लिश में ब्लॉग्स लिखे हैं. जो मन में आता गया, वह आपको बताता गया. आपने भी, अभी अभी तक, मुझे जितना प्रोत्साहन दिया, उसके लिए मैं आपका कृतज्ञ हूं. आपका यह प्यार हमेशा बना रहे यही इच्छा है और आगे भी रहेगी.
फ़िलहाल के दिनों मैं, हम सब ने बहोत सारी अद्भुत और अनाकलनीय परिस्थितियों का सामना किया है. अद्भुत इसीलिए क्यूंकि इन परिस्थितियों ने हमें बहोत सारी चीजो पर फेरविचार करना सिखाया, हमे हमसे ही नए से रूबरू कराया हैं. और अनाकलनीय इसीलिए क्योंकि , ऐसी परिस्थितियों का विचार हमने सिर्फ होलीवूड की फिल्मों को देखते हुए ही किया था. सुनसान शेहेर, एकसे बढ़कर एक आपत्तियां और उसमे फंसे बेचारे हम.
करोना का कहर पुरे विश्व मैं पिछले साल के अंतसे ही शुरू हो गया था. तभी ऐसा लगा न था, की ये वायरस पूरी मनुष्य जाती को घुटने पे बैठने के लिए मजबूर कर देगा. शुरुवात हुई थी सिर्फ २१ दिन के लॉकडाउन के साथ. जो आज तक कुछ हद तक हमारी सरकारों ने हटा दिया है. कई लाखों लोग केवल भारत वर्ष मैं इससे बीमार पड़े हैं. अच्छी बात ये हैं की मृत्युदर बहोत ही कम होने के कारन, मृत्युसंख्या कम रही है. पर हमने इस दौरान बहोत सारी चीजे सीखी है, जो हम में जो बदलाव आये है, उनकी प्रशंसा हमें जरुर करनी चाहिए. कभी कभी खुद की पीठ थपथपाना भी बहोत जरुरी हो जाता है.
पहली सींख ये हैं, की स्वच्छता के बारे मैं जो चीजे हम अब तक छोटी समजते रहे, वही चीजे आज बहोत बढ़िया काम कर रही हैं. अपने हाथों को हमेशा स्वच्छ रखना ये उसका प्रतिनिधिक उदहारण हैं. समाज मैं स्वछता के प्रति लगाव बढ़ने मैं ये सीख जरुर मदत करेगी. छोटी छोटी आदतों से ही, समाज परिवर्तन संभव हैं.
दूसरी सींख ये हैं की हमे मिलने वाले स्वतंत्रता के महत्त्व का एहसास हुआ. जो चीज हमें बचपन से मुफ्त मैं मिलती है, उसका महत्व हमें कम ही रहता हैं. यह एक इंसान का स्वाभाव है. पर तिन से चार महीने, घर पर रहने के बाद इसी स्वतंत्रता का महत्त्व समझ मैं आता है और इसको जतन करना बहोत ही महत्वपूर्ण हैं.
तीसरी सींख है, की हमें जिन प्रभुतियों का आदर्श हमेशा रखना चाहिए, वोह हमारे बिच मैं मौजूद थे. पर हमारा ध्यान उनकी तरफ कम ही गया था. पर, इस करोना की महामारी ने उनका महत्व फिरसे अधोरेखित किया हैं. और ऐसे अधोरेखित किया है, की हमें कभी भुलाना नहीं चाहिए, की हमारे रियल लाइफ हीरो तो हमारे आसपास ही होते है.
जी हा, मैं बात कर रहा हूँ, पुलिस कर्मचारी, मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हुए लोग और हमारे जवानों की. इन तीनो समाजघटकों ने जितना त्याग इस साल मैं, किया है, शायद ही किसी ने किया हो. उनके के प्रति आदर तो था ही, आज वह कई गुना बढ़ गया है. खुदकी जान की परवाह, न करते हुए केवल अपना काम करना और करते रहना बहोत कठिन है. और इसीलिए ये हमारे सच मैं, हीरो हैं. इनके साथ साथ ही, बैंक कर्मचारी, स्वछता सेवक, समाज सेवा मई जुटे कई प्रसिद्ध और अप्रसिद्ध लोगों को उनकी लगन, और निस्भीवार्थ सेवा के लिए प्रणाम है.
चौथी सींख है वह हमारे खुद के बारे मैं. करोना के पहले जैसा हमारा काम काज चलता था, उसका स्वरुप आज बदल गया है. हमने बहोत अछी तरीके से ये बदलाव अपनाये है. बहोत सारे लोग अपनी नौकरिया गवा बैठे हैं. पर बहोत सारे ऐसे भी है, जिन्होंने इस संकट के घडी मैं, एक संधि को देखा है. और खुद के नए व्यवसाय शुरू किये हैं. अर्थात परिस्थिति पूरी तरह से अच्छी भी नहीं है. पर ऐसे नव उद्यमियों के वजह से ही चलते समय मैं, रोजगार धीरे धीरे से बढ़ेंगे जरुर. कही एक बार पढ़ा था, की २००८ साल की मंदी ने, आज की कुछ बड़ी कंपनियों को जन्म दिया. आशा है, अगले दस- बारह साल के बाद हम भी यही कह सके.
पाँचवी सींख. संकट समय मदत करने वाले हजारों मिल सकते है, पर शुरुवात खुद से ही होनी चाहिए. बल्कि खुद को मदत करने मैं सबसे ज्यादा भलाई हैं. भले ही हर चीज मैं, स्वयंपूर्ण होना, हर वक्त मुकिन न हो, पर उसकी तरफ कदम उठाना, हमारी प्रथम जिम्मेदारी बननी चाहिए. बड़े बुजुर्ग वैसे भी कहते ही हैं न, जो खुद को मदत करता है, उसको भगवान् भी हमेशा मदत करता है.
छटवी सींख. पैसे प्रति जागरुक हो जाये. पैसा कमाना और बचाना महत्वपूर्ण है ही, उसके साथ साथ उसका निवेश भी बहोत महत्वपूर्ण हैं. अर्थात, इसके लिए अथक परिश्रम के साथ साथ ही, संपत्ति निर्मिती का अनुष्ठान भी मायने रखता है.
तो दोस्तों, ये थी कुछ चीजे, जो मैंने सीखीं है. अर्थात, इन चीजो के अलावा भी बहोत सिखने को मिला है. पर मुझे विश्वास है, की ये सारी चीजे आपने भी अनुभव की होंगी. और इसीलिए मैंने चाहा, की आपके सामने उनको उधृत करू. उनको आपके सामने रखु.
आपको ये विचार कैसे लगे, ये कमेंट मैं जरुर बताइयेगा. मेरा ये पहला प्रयत्न था, जिसमे मैंने अपने विचार हिंदी भाषा मैं, प्रगट किये. अगर कुछ भुलचुक हुई हो तो माफ़ी चाहता हूँ..
Comments
We all have experiened all this learning.
Especially point no. 3,we should not forget our heroes who are still fighting for all of us.