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मला भेटलेली खास व्यक्तिमत्त्वं - ब्लॉग पहिला - राहुल आरेकर.

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राहुल आरेकर. आपल्या पैकी अनेकांना परिचित अपरिचित असं नाव. अपरिचित या साठी कारण हा कोणी मोठा सेलिब्रिटी नाही. पण परिचित यासाठी कारण गेल्या नऊ वर्षांत याचे विचार कधी ना कधी तरी आपल्याला स्पर्शून गेलेले असतात. अगदी आपल्या न कळत. पण त्याचे विचार आपल्याला पटतात हे नक्की.  तो आम्हा मित्रांसोबत कीर्ती कॉलेजमध्ये शिकला. ही वेळ आपल्याकडे फेसबुक चा उदय होण्याची. आम्ही सगळे फेसबुकचा वापर वेळ घालवण्यासाठी करायचो. त्यावेळी या पठ्ठ्याच्या लक्षात आलं की फेसबुक चं पेज तयार करता येईल. इथपर्यंत आम्हीही विचार केला होता. पण कृती केली नाही. इथेच राहुलचं वेगळेपण अधोरेखित करावंसं वाटतं. या फेसबुक पेजच्या माध्यमांतून कमाई करता येते हे त्याने ओळखलं. आमच्या डोक्यात एवढा विचारही नव्हता. पण आज जेव्हा डिजिटल मार्केटिंग चं प्रस्थ एवढं वाढलेलं असताना त्याच्या दूरदृष्टीची कल्पना यावी.  पण त्याचा हा प्रवास काही सोप्पा नव्हता. त्याचं पहिलं पेज त्याला काही कारणांमुळे बंद करावं लागलं. अर्थात आपल्याकडे एक म्हण आहेच, "अपयश ही यशाची पहिली पायरी असते". कारण यामुळे खचून न जाता त्याने त्याचं दुसरं पेज सुरू केलं आणि म...

समय नियोजन

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ये ब्लॉग शुरू करने से पहले आप सबका धन्यवाद. मेरे पहले हिंदी ब्लॉग की आप सबने बहोत सराहना की, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं. आपके प्रोत्साहन से मुझे और ब्लॉग्स लिखने की उर्जा मिलती है.  आज कुछ एक विषय पर लिखने की बड़ी चाह थी, पर कुछ सूझ ही नहीं रहा था. पर लिखने की इच्छा तो प्रबल थी. अब क्या करे? सोच विचार किया. बाद मैं एक विचार आया. मैं कुछ ज्यादा ही सोच रहा हूँ. बाकि काम नहीं हो रहे. उससे अच्छा बाकि के काम निपटा देता हूँ. और वही किया. जब फिर बैठा, तब एक विचार आया, भाई ऐसा ही तो होता है. आप कई बार किसी चीज को लेकर हट पकड़ कर बैठ जाते हैं. वो काम तो होता नहीं. या फिर हो भी जाए तो बहोत समय बर्बाद हो जाता है. बल्कि बाकीके काम भी रुक जाते हैं. उससे अच्छा दुसरे काम करते रहो, ये काम करने का नया रस्ता मिल ही जाता है. और वही आज का विषय बन गया.   इस बात पर आप ने भी गौर किया होगा. कई बार, हम किसी चीज के पीछे रट लगाये पड जाते है. हमैं विश्वास होता है, की ऐसे करेंगे तो कामयाबी जरुर हासिल होगी. और बहुत बार यह सच भी होता है. आखिरकार कोशिश करने वाले की हार नहीं होती. पर उसी समय ये भी जान लेन...

करोना काल की छह सिंखे (मेरा पहला हिंदी ब्लॉग)

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नमस्कार. मैंने आज तक मराठी और इंग्लिश में ब्लॉग्स लिखे हैं. जो मन में आता गया, वह आपको बताता गया. आपने भी, अभी अभी तक, मुझे जितना प्रोत्साहन दिया, उसके लिए मैं आपका कृतज्ञ हूं. आपका यह प्यार हमेशा बना रहे यही इच्छा है और आगे भी रहेगी. फ़िलहाल के दिनों मैं, हम सब ने बहोत सारी अद्भुत और अनाकलनीय परिस्थितियों का सामना किया है. अद्भुत इसीलिए क्यूंकि इन परिस्थितियों ने हमें बहोत सारी चीजो पर फेरविचार करना सिखाया, हमे हमसे ही नए से रूबरू कराया हैं. और अनाकलनीय इसीलिए क्योंकि , ऐसी परिस्थितियों का विचार हमने सिर्फ होलीवूड की फिल्मों को देखते हुए ही किया था. सुनसान शेहेर, एकसे बढ़कर एक आपत्तियां और उसमे फंसे बेचारे हम. करोना का कहर पुरे विश्व मैं पिछले साल के अंतसे ही शुरू हो गया था. तभी ऐसा लगा न था, की ये वायरस पूरी मनुष्य जाती को घुटने पे बैठने के लिए मजबूर कर देगा. शुरुवात हुई थी सिर्फ २१ दिन के लॉकडाउन के साथ. जो आज तक कुछ हद तक हमारी सरकारों ने हटा दिया है. कई लाखों लोग केवल भारत वर्ष मैं इससे बीमार पड़े हैं. अच्छी बात ये हैं की मृत्युदर बहोत ही कम होने के कारन, मृत्युसंख्या कम रही है. पर ह...

How to be less ignorant ?

It's been while since I wrote my last blog. It's a pleasure to write which I was missing out. But was not getting a topic to talk about. And if you talk or write something unless you deeply feel it, it's waste of time and energy. It is like taking the other person for granted. Taking someone or something for granted is one of the biggest mistake we make. By taking things for granted we just be ignorant. Overlook the details. And many a times we find roots of our failures, defeats in our ignorance. This ignorance can take you from riches to rags, success to failure. Can divert your mind to distraction when actually you are supposed to focus. And I am sure, we all must have realized this one point or the other. Our feeling of envy, insecurity and regret comes out of this habit . But then how to overcome it ? How to be less ignorant that earlier and keep our ego in check. There could be multiple ways. And I am not an expert. I am just a simple person like you. But what ...